नितीश कुमार, अरविन्द केजरीवाल की राह पर

नितीश कुमार ने अपने एक अधिवेशन में नरेन्द्र मोदी की जम कर खिचाई की, यहाँ तक की उन्होंने नरेन्द्रNitish Kumar Sampark Yatra मोदी के भाषणों के क्लिप्स को भी सुनवाया और उनके द्वारा बिहार के लिए किये गए वादों की गिनती करवाई. नितीश ने बीजेपी और खास कर के नरेन्द्र मोदी और बाबा रामदेव द्वारा कला धन सम्बन्धी वादों की भी याद दिलवाई. नितीश ने जो भी बातें बताई वो वर्तमान राजनीती की तल्ख़ सच्चाई है . परन्तु वो शायद ये भूल गए हैं की राजनीती का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है की आप अपने प्रतिद्वंदी को मुफ्त की लोकप्रियता न दिलाएं. जिस तरह से नितीश जी ने नरेन्द्र मोदी के क्लिप्स को सुनवाया उससे तो यह लगा की भाषण नरेन्द्र मोदी का था और नितीश कुमार सिर्फ एक सूत्रधार की भूमिका में थे. नितीश जी शायद आप ये भूल गए हैं की राजनीती में बदनामी भी नाम ही है..

नितीश कुमार और अन्य जद (U) नेता शायद आने वाले चुनाव से पहले नरेन्द्र मोदी को expose कर देना Modi 2015चाहते हैं. कोई शक नहीं है की भाजपा आने वाले विधान सभा में लोक सभा चुनाव वाली सफलता को नहीं दुहरा पायेगी और इसका आगाज़ महाराष्ट्र से हो चूका है . महाराष्ट्र में जिस तरह से उसे शरद पवार का सहारा लेना पड़ा है वो सिर्फ यह साबित करता है कि सत्ता के लिए अपने सिद्धांत और पुराने सहयोगिओं से पिंड छुडाने में भाजपा  नंबर वन है. परन्तु मैं  उनकी इस निति की शिकायत नहीं करना चाहूँगा , कमोबेश Arvind Kejriwal 2015सभी पार्टियाँ ये करने में माहिर हैं. चाहे कुछ भी हो राजनीति शतरंज की तरह होती है जहाँ सत्ता पर काबिज होना ही महत्वपूर्ण है . अगर आप सत्ता हासिल करने के लिए राजनीती नहीं कर रहे हैं तो आप राजनीति कर ही नहीं रहे आप शायद आन्दोलन के नाम पर अपना और जनता के समय को नष्ट कर रहे हैं. ऐसे अदूरदर्शी नेताओं का हश्र अरविन्द केजरीवाल की तरह होता है जो शायद दिल्ली के चुनाव के बाद राजनेता से समाज सेवक बन जायेंगे. जहाँ जक भाजपा का सवाल है , उनकी किस्मत बुलंद है क्यों कि वर्तमान समय में देश काफी लम्बे समय के बाद अच्छे दौर से गुजर रहा है . पेट्रोल और डीजल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय कारणों से हो रही है, लेकिन भाजपा और खास कर के उसका नेतृत्व श्रेय लेने में माहिर है, मेरा तो मानना है की नितीश कुमार और जद U को भाजपा की तरह किसी विदेशी प्रचार कंपनी की सेवा लेनी चाहिए.

मैंने केजरीवाल की चर्चा इसलिए की क्योंकि आक्षेपों और खास कर के व्यक्तिगत आक्षेप के वो माहिर खिलाडी हैं. परन्तु उनकी इस नीती के कारन उन्हें नरेन्द्र मोदी के खिलाफ वाराणसी में बहुत बुरी हार को झेलना पड़ा. क्या नितीश कुमार भी केजरीवाल का अनुसरण करने की सोच रहे हैं , कुछ तो समानता है दोनों में . केजरीवाल ने दिल्ली के मुखमंत्री पद को छोड़ा और नितीश ने बिहार में मुखमंत्री पद छोड़ा .  जहाँ तक जद U और आप पार्टी का सवाल है दोनों ही पार्टियाँ अपनें अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं , दोनों ही पार्टियों के मुख्य नेता अपने केंद्रीय लगाम के इस्तेमाल के लिए जाने जाते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *