Cheating in Bihar Examination – Reasons , Solution

आज कल खबरिया चैनलों पर बिहार की माध्यमिक परीक्षा में हो रही चोरी को जरूरत से ज्यादा ही दिखाया जा रहा है. ये बड़े ही आश्चर्य  का विषय है कि इंडिया टीवी, CNN IBN और ABP जैसे न्यूज़ चैनल इस मसले को कुछ ऐसे पेश कर रहें हैं जैसे पBihar Matric Exam Cheatingरीक्षा में चोरी कुछ नयी बात है और उसके लिए सिर्फ नितीश कुमार दोषी हैं. सच्चाई तो ये है की पिछले दस वर्षों में बिहार की माध्यमिक परीक्षा में चोरी जबरजस्त बढ़ी है और साथ ही बढ़ोतरी हुई है उत्तीर्णता प्रतिशत में. प्रथम श्रेणी में माध्यमिक परीक्षा ऊतिर्ण करने वाले छात्रों की संख्या में भी वृद्धि हुई. बड़ी संख्या में ये छात्र विभिन्न तरह के स्कालरशिप को भी ग्रहण करते हैं और अपनी शिक्षा को जारी रखते हैं.

बिहारी समाज में लोग बड़े बड़े घोटाले या देश से गद्दारी नहीं करते हैं और उनकी नजर अपनी छोटी छोटी जरूरतों पर ही केन्द्रित रहती है. बदलते समय के साथ आज के समय में कागज़ी .डिग्रीयों का महत्त्व अत्यधिक बढ़ चूका है. आज के समय में कांस्टेबल या चपरासी बनने  के लिए भी आपको १०+२ पास होना जरूरी है. जबकि सच्चाई ये है की सिपाहियों  की बहाली के सवालों का स्तर पांचवी से अधिक का नहीं होता. ये छात्र और छात्राएं जो बोर्ड की परीक्षा में चोरी कर रहे हैं, वे ज्यादातर ऐसे परिवारों से आते हैं जहाँ कांस्टेबल, चपरासी या एलडीसी का पद का महत्व किसी बड़ी कंपनी के सीईओ बनने से ज्यादा होता है. अगर सरकार इन निम्न कोटि की नौकरियों के लिए न्यूनतम योग्यता में कमी कर दे तो आज जो ये विद्यार्थी   बिहार बोर्ड को बदनाम कर रहे हैं शायद इतनी दूर तक पढाई करने की जहमत भी ना उठायें. आज जब रेलवे ट्रैक को साफ़ करने वाले ग्रुप डी स्टाफ बनने के लिए भी मेट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करना जरूरी है तो ऐसी स्थिति में परीक्षा में चोरी होने की सम्भावना भी बढती है. यहाँ मैं एक जरूरी बात का उलेख करना चाहूँगा की बिहार मे सीबीएसई अथवा इससे बोर्ड से पास करने वाले विद्यार्थी शायद ही पंचायत शिक्षक, सिपाही, चपरासी, ग्रुप डी पदों के लिए आवेदन करते हैं क्योंकि जिस किसी ने भी १०+२ तक ईमानदारी  से पढाई की है वो इन पदों की तरफ आकर्षित नहीं होते  है. इक आखिरी बात , राज्य और केंद्रीय सरकार सिपाही के पदों के लिए १०+२ की योग्यता चाहती है जबकि १०+२ पास छात्र चाहे तो NDA की परीक्षा उत्तीर्ण कर के कमीशन ऑफिसर बन सकता है जिसके निचे ६०- ७० सिपाही, और ४-५ दरोगा रैंक के कर्मचारी काम करते हैं. अब सवाल ये उठता है की एक पढने वाला विध्यार्थी NDA को त्याग कर कांस्टेबल बनना क्यों मंजूर करेगा.

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