बोर्ड परीक्षा परिणाम- यथार्थ से पर्दा क्यों

उत्तर प्रदेश में बड़े शहरों के बच्चों का प्रदर्शन छोटे शहरों और गांवों के बच्चों से कमतर रहा , बिहार में भी कमोबेश यही कहानी है. कभी कभी तो गहरा आश्चर्य होता है की इन जगहों में कोई जादू है क्या की बिना किसी शैक्षणिक माहौल और संरचना के, बच्चे  बोर्ड परीक्षा में इतना अच्छा प्रदर्शन करते हैं.1e

पहले उत्तर प्रदेश और अब बिहार, छोटे शहरों और गांवों की प्रतिभा के डंके हर जगह बज रहे हैं , कहीं किसी गरीब किसान के लड़के के प्रदर्शन की चर्चा है तो कहीं किसी गरीब लड़की के परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन की चर्चा है  इस चर्चा में हम ये भूल गए हैं की सिर्फ दो महीने इन्हीं समाचार पत्रों में उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ , मध्य प्रदेश, राजस्थान और यहाँ तक की ईमानदार समझे जाने वाले केरल और तमिल नाडू के बोर्ड इम्तहानों में अनियमितता की जोरदार चर्चा हो रही थी. परीक्षा में चोरी और सीनाजोरी की तस्वीरें ज्यादातर इन्हीं छोटे शहरों की ही छप रहीं थीं और व्यवस्था का मजाक तो चरम पर पहुँच गया था जब बिहार के शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट कर दिया था की इम्तहान में चोरी रोकना उनके लिए संभव नहीं और अभिभावकों और शिक्षकों को अपनी जिम्मेवारी समझनी चाहिए. संभव भी कैसे हो , जव आपके द्वारा परीक्षा में दी गयी शिथिलता आपके वोट बैंक को बढाती हो यहाँ तक की विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर ज्यादा उछाल नहीं मारा.

उस वक्त तो लगा की शायद समाचार पत्र वाले ईमानदारी दिखायेंगे और चोरी से परीक्षा में अच्छे अंक लाने वालों का डंका पीटने से बचेंगे. परन्तु सभी को ध्यान रहे , पत्रकारिता के धंधे में भी वो सब कुछ लागू होता है जो राजनीती के लिए जरूरी है . शायद इस लिए नेताओं की तरह पत्रकारों ने भी हार मान ली है और अखबार बेचने के लिए चोरों की मुखालफत ना करने में ही भलाई समझ रहे हैं.

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