जौहर और शका – आखिर क्या है सच्चाई

आज कल हवा बहुत गरम है कि रणथंबोर के बहादुर राजपूत महिलाओं ने महान बादशाह अलाउद्दीन खिलजी  से अपने आन  की रक्षा के लिए खुद को जला  क्र भस्म क्र लिया था।  मुझे सिर्फ चन्द सवालों के उत्तर चाहिए जो की मेरे उत्सुक मन को बार बार कचोट symbol-of-jauharरहे हैं :

१. क्या मुस्लिम शासक सिर्फ राजपूत महिलाओं पर नजर गड़ाए रहते थे क्योंकि ब्राम्हण , बूमिहार, कायस्थ , जाट , यादव, कहार , डौम , चमार महिलाओं ने जौहर नहीं किया था , क्या इन महिलाओं को इन हमलावरों से कोई खतरा नहीं था।

२. जौहर का घटिया प्रचार क्र के वर्तमान मीडिया क्या यह  साबित करना चाहती है कि राजपूत महिलाये सोचती थी कि , मुस्लिमों को औरत की इज़्ज़त करनी नहीं आती और उनसे रिश्ता जोड़ने की बजाय जल क्र मर जाना अच्छा होता है.jauhar-memorial-rajasthan

३. मेवाड़ जहाँ की राजपूत महिलाओं ने १३०३ ,  १५३५ और १५६८ ईस्वी में जौहर किया , ऐसा इतिहास में कहा जाता है और इसके साक्ष्य भी मिले हैं परंतु ये जांच करने की कोशिश नहीं की गयी की कही वो किसी तांत्रिक पूजा के तहत बलि तो नहीं चढाई नहीं गयी थी या फिर राजघराने के लड़ाई में रानियों के एक समूह ने दुसरे समूह का धर्म के नाम पर काम तमाम क्र दिया हो.

४. इतने सारे जौहर और शका होने के बावजूद राजपूतों की संख्या में कभी कमीं नहीं आयी और वर्तमान में भी वो अपनी वीरगाथा सुना क्र के समाज को प्रफुल्लित करते रहते हैं।

jauhar1५. आज के आधुनिक समय में राजपूत जाति  के लोगों में दहेज़ हत्या के केस बहुत ज्यादा होते हैं कहीं जौहर के नाम पर दहेज़ हत्या तो नहीं हो रही थी।

६. उसी काल में जब जौहर हुआ करता था तब बहुत सारी राजपूत महिलाओं ने मुसलमान बादशाहों की बेगम के रूप में अपने जीवन का विकास किया और अपनी संतानों को भी देश का बादशाह बनाया।  क्या वो दूरदर्शी महिलाएं पूजनीय नहीं हैं और हमें आत्म हत्या करने वाली महिलाओं की पूजा करने को कहा जाता है।

७. महिलाये जौहर करती थी अपने आप को अग्नि में समर्पित कर के ,  वहीँ पुरुष शका  करते थे पिले वस्त्र में अपनी अंतिम सांस तक मुसलमानों से युद्ध क्र के।  कहा जाता है की महिलाये अग्नि में समर्पित हो क्र के मुक्ति पा लेती थीं परंतु उन पुरुषों का तो अंतिम संस्कार तो निसंदेह नहीं हो पता होगा क्योंकि मुस्लिम शासकों ने उनका अंतिम संस्कार हिन्दू रीती से तो नहीं ही किया होगा ऐसे में तो उनकी आत्मा आज भी भटक रही होगी। उनकी मुक्ति के लिए क्या कदम उठाये गए हैं।

 

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