आर्थिक सर्वेक्षण २०१७ – मोदी सरकार ने देश का कबाड़ा बनाया

नोटबंदी से क्या फायदा हुआ ?

अरुण जेटली का कहना है की मकानों के दाम कम हो गए हैं , अब लोग नए मकान खरीद सकेंगे।  चलो अच्छा है मोदी ने छड़ी घुमाई और मकानों के दाम कम हो गए , आख़िरकार नोटबंदी का फायदा नजर आने लगा।

इस सवाल का एक और जवाब है

मकानों के दाम कम हो गए हैं क्योंकि लोगों के पास खरीदने की क्षमता कम हो रही है।  ये क्षमता कम क्यों हो रही है , ज्यादा राकेट साइंस लगाने की जरूरत नहीं है – लोगों के पास पैसा नहीं हैक्योंकि  वर्तमान परिस्थितियों में  वो कमा नहीं पा रहे हैं।  बिल्डर और रियल एस्टेट वाले जल्दी से जल्दीअपने धंधे के फंदे  से बाहर भागना चाहते हैं , अतः उन्होंने मकानों के दाम कम किये हैं

एक बात और अगर आपके पास कोई रिहायशी अथवा कमर्शियल प्रॉपर्टी है तो उसके दाम कम हो चुके हैं।  मोदी ने बैठे बिठाय आपकी औकात घटा दी है।

जमीन की कीमतों में कमी सिर्फ रियल एस्टेट सेक्टर में सिमित नहीं है , वो किसान जिनके पास कृषि योग्य जमीन है उसकी भी  कीमत कम  हुई है।

Narendra Modiकाले धन का क्या हुआ ?

नोटबंदी के चक्कर में घंटों एटीएम की लाइन में लगने के बाद , १०० से अधिक लोगों को मरते देखने के बाद भी आप अपने हिस्से के काले धन को भूले नहीं हैं , लगता है जब आपको मोदी और उनके भक्त छड़ी से मरेंगे तभी आपकी अक्ल ठिकाने आएगी।  अरे भाई मोदी जी प्रधानमंत्री हैं उनकी जो इच्छा है वो सर्वोपरि  है।  उन्हें कला धन मिल गया है और उससे वो गरीबों के कल्याण का  वादा भी  करने लगे हैं , मिशन २०१९  चालु हो चूका है।

बेरोज़गारी का क्या  हुआ ?

भक्त बन जाओ थोड़ा बहुत तो रोज़गार तो हो ही जायेगा , वैसे  नरेंद्र मोदी जी ने विदेशों में जो इम्प्रैशन बनाया है आप चाहो तो दुनिया में  कहीं चले जाओ आपको कुछ ना कुछ तो मिल ही जायेगा।  विश्वास नहीं तो H 1 बी वीसा पर अमेरिका  में खट रहे  IIT  pass outs से पूछो। वैसे कुछ भक्त इकोनॉमिस्ट ने कहा है की अमेरिका से लौटने वाले सॉफ्टवेर प्रोफेशनल्स ही मोदी जी के डिजिटल प्लान को मूरत रूप देंगे। कृपया आगे पढ़ने से पहले भारत माता की जय करना ना भूलें।

किसानों को घाटा  हो रहा है , फसल की उचित कीमत नहीं मिल रही है ?

इसी को तो असली तरक्की कहते हैं किसान को कीमत नहीं मिल रही और साधारण ग्राहक को राहत नहीं मिल रही।  तीन  वर्ष पहले दाल की कीमत ७० रुपये होने पर सड़क पर रोडशो करने वाली बीजेपी नेत्रियां अब दाल की कीमत पर चूं चूं भी नहीं करती , ध्यान रहे पिछले ढाई वर्ष में अरहर दाल की कीमत कभी भी १३० रुपये के नीचे  नहीं गयी.

arun jaitley angryरुपये में गिरावट , निर्यात में गिरावट , मजदूरों की आमदनी में गिरावट आदि के बारे में मोदी जी के आर्थिक सर्वे का क्या विचार है ?

ज्यादा सवाल नहीं करने का , पहले ही कहा था की मोदी जी रूटीन प्राइम मिनिस्टर नहीं हैं अभी तो तुझे दिन में तारे भी दिखाएंगे मोदी जी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *