बिहार एसएससी घोटाला – AVN स्कूल के मालिक पर कार्यवाही

क्या बिहार एसएससी के इम्तिहान में जो घोटाला पकड़ा गया है उसके लिए सिर्फ जो लोग पकडे गए हैं सिर्फ उन्हें ही दोषी माना जा सकता है।  मेरा मानना है की थोड़ा सा हमें अपनी मानसिकता को भी टटोलने की जरूरत है।  आज हमारा समाज इतना गिर चूका है कि हमें किसी नौकरी की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति कर्मठ और योग्य नजर आता है।  ये बात शायद पूरी दुनिया के लिए सही  ना  हो परंतु बिहार के लिए तो बिलकुल सही है।  सबसे  बड़ी समस्या है की सरकारी नौकरी को लोग पारिवारिक सम्पति की तरह मानते हैं।  लोगों को  पता है की बिहार सरकार में  काम  वाले ज्यादातर लोग अपनी तनख्वाह से कहीं ज्यादा ऊपरी कमाई कमाते हैं  और सबसे अच्छी बात है कि सरकारी नौकरी में कोई खास मेहनत का काम नहीं होता है और अगर कोई नौकरी करता हुआ मर जाए तो उसके आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल जाती है.

अब AVN स्कूल के संचालक रामाशीष सिंह को ही ले , कहने को तो वो तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैं पर हैसियत इतनी की राजधानी पटना में इतने बड़े कैम्पस वाले विद्यालय के मालिक हैं , इतनी अकूत सम्पति के मालिक होते हुए भी वो अदनी सी नौकरी करने में हिचकते नहीं  हैं।  श्रीमान सिंह जैसे सफल लोग ही अन्य लोगों को प्रेरित करते हैं की चाहे जो भी हो जाये सरकारी नौकरी से बढ़ कर कुछ भी नहीं होता है।

बिहार एसएससी के चेयरमैन सुधीर कुमार ने तो स्टेटमेंट दिया है की उन्हें नेताओं , अधिकारियों और अन्य कई सत्ता के नजदीकी लोगों का दबाव झेलना पड़ता है।  अब सवाल है की जब अभ्यर्थियों ने भ्रष्टाचार  को बेनकाब कर दिया तो जनाब सुधीर कुमार, जो की एक आईएएस हैं, अब दबाव का राग अलाप रहें है , मेरा सवाल है कि जनाब पहले सो रहे थे क्या , संलिप्तता नहीं तो कायरता तो बिलकुल स्पष्ट है और ऐसे कर्तव्यहीन व्यक्ति को अभी तक अध्यक्ष पद पर आसीन रहने दिया गया है तो एक बात स्पष्ट है की सब कुछ कहीं और से नियंत्रित किया जा रहा है।

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