Samastipur , The New Victim of Riots

अगर कोई फरवरी में आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के १० दिन के बिहार दौरे को याद करे , तो उन्होंने बिहार के भगवाकरण पर काफी संतोष जाहिर किया था और बिहार के मुख्यमंत्री और प्रशासन को धन्यवाद दिया था।  बहुत सम्भव है कि आरएसएस और उससे जुडी संस्थाओं के शक्ति संवर्धन से उन्हें काफी संतुष्टि हुई थी।  हाल के दिनों में बजरंग दल और आरएसएस  या विश्व हिन्दू परिषद से जुडी संस्थाओं ने स्थानीय भाजपा नेताओं की मदद से घटनाओ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है और भगवा समर्थकों को आत्मविश्वास दिया है वो काबिले तारीफ है।  कहना पड़ेगा की भले ही गुजरात में भाजपा को बहुत ज्यादा नुक्सान हुआ है और लोग खुले आम भाजपा की खिल्ली उड़ा रहे हैं पर भाजपा ने उत्तर प्रदेश और बिहार को पूरी तरफ से मुट्ठी में ले लिया है।

बिहार में लगातार हो रहे साम्प्रदायिक उपद्रव की कड़ी में समस्तीपुर का नाम भी आ गया है। इंटरनेट पर वायरल हो रही  जानकारी के अनुसार, जिले के रोसड़ा कस्‍बे में कुछ शरारती तत्‍व जामा मस्जिद पर जुट गए और उसपर चढ़कर भगवा झंडे लगा दिए। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में एक युवक मस्जिद की मीनार पर चढ़कर भगवा झंडा लहराता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशासन इस पूरी घटना के दौरान मूकदर्शक बना रहा। इस पूरी घटना को औरंगाबाद में रामनवमी जुलूस के दौरान हुए विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

भगवा पक्ष के लोगों का कहना है कि जब रामनवमी के अवसर पर माता का प्रतिमा विसर्जन जुलुस गुदड़ी बाजार की मस्जिद के पास से गुजरा तो किसी ने जुलुस की तरफ चप्पल फेंका और उसी अपमान का बदला लेने के लिए रामनवमी जुलुस के लोगों ने मस्जिद पर भगवा झंडा फहरा दिया।  वैसे जिले के पुलिस अधिकारी काफी समय तक इस घटना को छुपाने की कोशिश करते रहे पर इस घटना का वीडियो वायरल हो चूका है।

भाजपा पहले भी बिहार में शासन में रही है पर हर बार उसे अपमान का घूँट पीना पड़ा क्योंकि नितीश कुमार ने कभी भी साम्प्रदायिकता पर समझौता नहीं किया।  आश्चर्य की बात है कि पिछले १५ साल के तीन चुनावों में भाजपा को सबसे कम सीट २०१५ में मिली लेकिन आज पहली बार वो बिहार में अपने हिंदुत्व एजेंडा को लागू करने में सफल है और भगवा समर्थक भी काफी उत्साहित हैं।

 

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